मधुमक्खियां शहद कैसे बनाती हैं?

कर्मचारी मधुमक्खियां (जो पूरी छत्ते पर मधुमक्खियों की संख्या की 98% होती हैं) एक जटिल प्रक्रिया के अंतर्गत शहद का निर्माण करती हैं। 

बहुत सारी मधुमक्खियां जरुरी हैं; क्योंकि कोई एक मधुमक्खी टीम के अन्य सदस्यों के बिना शहद का निर्माण नहीं कर सकती है।

संक्षेप में, “संचरण मधुमक्खियां” फूलों का रस चूसकर इसे अपने दूसरे विशेष पेट में रखती हैं (जो विशेष रूप से शहद रखने के लिए बना होता है) और उड़कर वापस छत्ते पर आती हैं

छत्ते पर आने के बाद, वे इस रस को “चबाने वाली” मधुमक्खियों को देती हैं। चबाने वाली मधुमक्खियां रस इकट्ठा करती हैं और इसे लगभग 30 मिनट तक चबाती हैं।

चबाने के दौरान, उनके एंजाइम रस को एक ऐसे पदार्थ में बदलते हैं जिसमें पानी के साथ शहद शामिल होता है। चबाने के बाद, कर्मचारी मधुमक्खियां उस पदार्थ को मधुकोषों में डाल देती हैं 

कि पानी वाष्प बनकर उड़ जाए, जिससे शहद कम पतला होता है। मधुमक्खियां अपने पंखों से हवा करके पानी के वाष्पीकरण की प्रक्रिया को तेज करती हैं। 

शहद का उत्पादन समाप्त होने के बाद, दूसरी मधुमक्खियां मोम से छत्ते के कोषों को बंद कर देती हैं, ताकि उत्पाद सुरक्षित रहे।

मधुमक्खियां अपने उत्पादों (शहद, रॉयल जेली, प्रोपोलिस आदि) को अपने प्रयोग के लिए निर्मित और संग्रहीत करती हैं।

सर्दी और अन्य अवधियों के दौरान जब पराग उपलब्ध नहीं होता तो वे शहद खाकर ज़िंदा रह सकती हैं। 

मधुमक्खी पालन करने वाले लोग वास्तव में शहद लेते समय उनके इस आपातकालीन भंडार के एक हिस्से को “चुराते” हैं।

लेकिन एक उचित मात्रा में शहद एकत्रित करने पर, मधुमक्खियां मनुष्यों द्वारा ली गयी शहद की मात्रा दोबारा उत्पन्न करके इसकी भरपाई कर लेंगी

और इस प्रकार वे बिना किसी समस्या के अपना जीवन-चक्र जारी रख सकती हैं।

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