सूरदास का जीवन परिचय हिंदी में|Surdas Ka Jivan Parichay


Surdas Ka Jivan Parichay

मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो|

भोर भए गैयन के पाछे,

मधुबन मोहि पठायो||

आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे महाकवि की जिसने अपनी कृष्ण भक्ति सागर में गोते लगाते हुए पदों की रचना से सभी के दिलों में अपनी एक अमिट छाप छोड़ दी है| इनका नाम है सूरदास| आपको बता दें, सूरदास को हिंदी भाषा का सूर्य भी कहा जाता है|

ये सगुण भक्ति के महान कवियों में गिने जाते थे| इन्हें वात्सल्य रस का सम्राट भी कहा जाता था| ऐसा कहा जाता है की सूरदास को तुलसीदास जी उद्धव का अवतार मानते थे|

Surdas Ka Jivan Parichay का सबसे सटीक और सरल विवरण आपको हमारी ही website पर मिलेगा| अगर आपने हमारा ये article अच्छे से पढ़ लिया तो आपको Surdas Ka Jivan Parichay क्या है ये किसी से भी पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी|

सूरदास का असली नाम?

कुछ विद्वानों का मानना है कि सूरदास का बचपन का नाम मंगल दास था| वहीं कुछ लोग इनके बचपन का नाम मदन मोहन मानते हैं|

सूरदास का जन्म कहां हुआ?

दोस्तों, सूरदास के जन्म को लेकर अलग-अलग विद्वानों के अलग-अलग मत हैं| अब इसमें से किसकी बात सही है और किसकी गलत ये फैसला हम आप पर छोड़ते हैं| बहुत से विद्वानों का मानना है कि सूरदास का जन्म रुनकता क्षेत्र में हुआ था|

यह क्षेत्र आगरा मथुरा road पर स्थित है| कुछ विद्वान ये भी मानते हैं कि सूरदास का जन्म सीही नामक क्षेत्र में हुआ जो कि दिल्ली के पास है|

इनका जन्म एक निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था| इनके पिता का नाम था पंडित राम दास| सूरदास मथुरा के गऊ घाट पर श्री नाथ जी के मंदिर में रहते थे|

आज हम आपको Surdas Ka Jivan Parichay बता रहे हैं|

Surdas Ka Janam Kab Hua?

इनका जन्म लगभग 1478 ईस्वी में माना जाता है| इनका जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी के दिन हुआ|

क्या सूरदास जन्मांध थे?

जन्मांध का मतलब है जन्म से अंधे होना| जिस प्रकार सूरदास के जन्म स्थान को लेकर लोगों में मतभेद हैं ठीक उसी प्रकार इनकी जन्मांधता को लेकर भी विद्वानों के अलग अलग मत हैं| इसके पीछे की कहानी से आपको वाकिफ कराते हैं|

सूरदास के पिता का नाम रामदास था| एक बार सूरदास के पिता की मुसलमानों के साथ लड़ाई हो गई| तब इस लड़ाई में सूरदास के 6 भाई भी मारे गए|

सूरदास भागकर इधर उधर भटकते रहे| घने जंगलों के बीच अंधेरे में पता नहीं चला और वो कुएं में जा गिरे| कहते हैं की सूरदास पूरे छह दिन तक उसी कुएं में रहे| वो वहीं पर अपने गिरधर को याद कर पद गाते रहे| फिर सातवें दिन भगवान कृष्ण ने अपने इस अनन्य भक्त की सुध ली|

सातवें दिन वो दर्शन देने आ पहुंचे| तब इन्हें कुछ नजर नहीं आता था| भगवान को देखने की लालसा थी| भगवान ने उन्हें दृष्टी दी| अब वह उन्हें देख सकते थे| जब भगवान ने वर मांगने को कहा तो सूरदास ने कह दिया की हे प्रभु, मैंने जिन आंखों से आपके मनोहर दर्शन किए हैं|

ये आंखें अब और कुछ भी, किसी को भी न देख सकें| इसी के साथ उनकी आंखों की ज्योति चली गई| अब सूरदास जीवन भर के लिए नेत्रहीन हो गए| लोग ईश्वर से आंखें मांगते हैं, सूरदास ने न देख पाने वाली भक्ति मांगी थी|

सूरदास का विवाह

लोगों का इस बारे में भी अलग-अलग मत है| क्या सूरदास का विवाह हुआ था ये हर कोई किसी न किसी विद्वान से कभी न कभी पूछ ही लेता है| कुछ लोगों का कहना है कि सूरदास का विवाह हुआ था| लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती की सूरदास का विवाह वास्तव में हुआ था या नहीं|

Surdas Ke Dohe

हाथ छुड़ाये जात हो, निर्बल जानि के मोय।

हृदय से जब जाओ, तो सबल जानूँगा तोय।।

मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायौ।

मोसौं कहत मोल कौ लीन्हौ, तू जसुमति कब जायौ?

कहा करौं इहि के मारें खेलन हौं नहि जात।

पुनि–पुनि कहत कौन है माता, को है तेरौ तात?

गोरे नन्द जसोदा गोरी तू कत स्यामल गात।

चुटकी दै–दै ग्वाल नचावत हँसत–सबै मुसकात।

तू मोहीं को मारन सीखी दाउहिं कबहुँ न खीझै।

मोहन मुख रिस की ये बातैं, जसुमति सुनि–सुनि रीझै।

सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई, जनमत ही कौ धूत।

सूर स्याम मौहिं गोधन की सौं, हौं माता तो पूत॥

चरन कमल बंदौ हरि राई

जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै आंधर कों सब कछु दरसाई॥

बहिरो सुनै मूक पुनि बोलै रंक चले सिर छत्र धराई

सूरदास स्वामी करुनामय बार–बार बंदौं तेहि पाई॥

मुख दधि लेप किए सोभित कर नवनीत लिए।

घुटुरुनि चलत रेनु तन मंडित मुख दधि लेप किए॥

चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए।

लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए॥

कठुला कंठ वज्र केहरि नख राजत रुचिर हिए।

धन्य सूर एकौ पल इहिं सुख का सत कल्प जिए॥

बूझत स्याम कौन तू गोरी।

कहां रहति काकी है बेटी देखी नहीं कहूं ब्रज खोरी॥

काहे कों हम ब्रजतन आवतिं खेलति रहहिं आपनी पौरी।

सुनत रहति स्त्रवननि नंद ढोटा करत फिरत माखन दधि चोरी॥

तुम्हरो कहा चोरि हम लैहैं खेलन चलौ संग मिलि जोरी।

सूरदास प्रभु रसिक सिरोमनि बातनि भुरइ राधिका भोरी॥

Sahitya Lahari Kiski Rachna Hai?

अगर आप competitive exam की तैयारी कर रहे हैं तो आपको ये मालूम होना चाहिए की Sahitya Lahari Kiski Rachna Hai? क्योंकि बहुत बार किसी न किसी exam में ये पूछ लिया जाता है कि Sahitya Lahari Kiski Rachna Hai? साहित्य लहरी महान कवि सूरदास की रचना है|

Surdas Ke Guru Kaun The?

हो सकता है कुछ लोगों को ये मालूम भी हो कि Surdas Ke Guru Kaun The? लेकिन ज्यादातर लोग ये नहीं जानते हैं कि Surdas Ke Guru Kaun The? चलिए हम आपको बताते हैं कि Surdas Ke Guru Kaun The? Surdas Ke Guru का नाम था वल्लभाचार्य|

सूरदास जी की काव्य भाषा क्या है?

हिंदी साहित्य का सूर्य कहे जाने वाले कवि सूरदास के बारे में लोग अक्सर ये पूछते रहते हैं की सूरदास जी की काव्य भाषा क्या है? जिन लोगों को नहीं पता है की सूरदास जी की काव्य भाषा क्या है उन्हें हम बताना चाहेंगे की उनकी काव्य भाषा ब्रजभाषा है|

Surdas Ki Bhasha Shaili

Surdas Ki Bhasha Shaili के बारे में तो आप सभी जानते हैं| उनकी भाषा शैली में एक अजब सी कलात्मकता है और प्रौढ़ता साफ़ तौर पर देखी जा सकती है|

निष्कर्ष (Conclusion)

अपने शब्दों को विराम देते समय हुए मै यही कहना चाहूंगा की सूरदास एक प्रसिद्ध कवि थे| उन्होंने ताउम्र अंधता का वरदान माँगा था| सूरदास के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए| 

उनकी कृष्ण भक्ति में डूबे हुए पद हर किसी की जुबान की शोभा बढ़ा रहे हैं| अगर आपको हमारा ये article पसंद आया हो तो इसे like करें तथा share करें|

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