जानिये ज्वार क्या है ? ज्वार की रोटी खाने के फायदे और नुकसान | Jwaar Kya Hai


ज्वार

Hello guys। कैसे हैं आप सब? हम जानते हैं आप हमारा बेसबरी से इंतजार कर रहे थे। लीजिए, हम हाजिर हैं एक और interesting topic के साथ। आज हम आपको बताने वाले हैं ज्वार (Jwaar) के बारे में। वैसे तो बुखार को भी ज्वर कह दिया जाता है। लेकिन आज हम जिसकी बात कर रहे हैं वो ज्वार खेतों में पाया जाने वाला और बहुत लाभकारी है। ज्वार  के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारे साथ अंत तक बने रहिए। हम आपको बताएंगे कि ज्वार क्या होता है? ज्वार की रोटी खाने के क्या फायदे हो सकते हैं? किन-किन बीमारियों को दूर करने में ज्वार का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

दोस्तों, ज्वार में विभिन्न प्रकार के प्रोटीन, मिनरल और विटामिन्स काफी अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके अतिरिक्त कैल्शियम, पोटेशियम, फासफोरस और आयरन की प्रचुर मात्रा भी ज्वार में पाई जाती है। ज्वार में कैलोरी तो बहुत कम होती है लेकिन इसके फायदों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। बहुत से लोग ज्वार को अनाज के रूप में लेते हैं।

चलिए आपको अब बताते हैं कि ज्वार क्या होता है?

ज्वार क्या है? (What is jwaar)

दोस्तों, ज्वार एक फसल है जो कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है। ज्वार अनाज और चारा दोनों के रूप में प्रयोग किया जाता है। ज्वार को जानवरों के लिए बहुत ही ज़्यादा पौष्टिक आहार माना गया है। ज्वार के दाने बहुत ही कोमल होते हैं और इन्हें अकसर भून कर ही खाया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें, भारत में यह फसल करीब सवा 4 करोड़ एकड़ भूमि में उगाई जाती है। यह फसल अगस्त से लेकर अक्टूबर के महीने तक में सबसे ज़्यादा फलती-फूलती है।

अलग-अलग भाषाओं में ज्वार का नाम (Names of Jwaar in different languages)

अब ये भी जान लीजिए कि ज्वर को अलग-अलग भाषाओं में किन नामों से जाना जाता है। अगर बात की जाए english की तो ज्वार को अंग्रेजी में कहते हैं ब्रूम काॅर्न, गुनीया काॅर्न, इंडियन मीलेट, सोरघो और ग्रेट मीलेट। इसका botanical नाम है sorghum bicolor।

दोस्तों, आप में से शायद बहुत ही कम लोग ये जानते होंगे कि ज्वार पोऐसी कुल का पौधा माना जाता है। तेलगू भाषा में ज्वार को जोन्नलू और जोन्नल कहते हैं। तो वहीं, तमिल में ज्वार को चोलं या चोन्नल कहा जाता है। हिन्दी में इसे जुआर, ज्वार, जुवार, जनेश, जुनहरी आदि बोलते हैं।

इक्षुपत्रक, यावनाल तथा जूर्ण इसके Sanskrit में कहे जाने वाले नाम हैं। ओरिया भाषा में इसे झाना कहा जाता है। कन्नड़ भाषा में ज्वार को कहते हैं जोला। गुजराती में इसे जुवार, जुआर के नाम से जाना जाता है। बंगाली में जुयारा, जोवार कहते हैं।

Nepali language में ज्वार को कहा जाता है जुनेलो। Punjabi भाषा में jwaar को कहते हैं जुरनी। मराठी भाषा में कहते हैं ज्वारी, जोंधला। मल्यालम भाषा में इसे बोलते हैं चोलम। अरबी भाषा में जवारस और जूरा कहते हैं। परशियन भाषा या पारसी भाषा में ज्वार को कहते हैं जुरेमका, जवारसे-हिन्दी आदि।

ज्वार की रोटी खाने के फायदे: (Benefits of Eating Jwaar Chapati )

Jwaar ki roti khane ke fayde
  • दोस्तों, ज्वार की रोटी खाना उन लोगों के लिए भी लाभदायक है जिन्हें गेहूं से एलर्जी होती है।
  • अगर हमें अपने पाचन तंत्र (Digestive System) को दुरुस्त करना है तो हमें fiber युक्त पदार्थों का अधिक से अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए। बेहतर यही होगा कि आप गेहूं की रोटी की बजाए ज्वार की रोटी खाएं जो fiber से भरपूर होता है।
  • ज्वार के एक बार के सेवन से ही हमें पूरे दिन का लगभग 48 प्रतिशत fiber मिल जाता है। जो कि 12 gram से अधिक होता है।
  • ज्वार का अधिक से अधिक मात्रा में सेवन करना हमारी शरीर में cholesterol यानी एलडीएल को हटाने में भी मदद करता है।
  • इससे हमारा Heart भी healthy हो जाता है। धमनियों (Arteries) के सख्त होने को भी ये रोकता है।
  • ज्वार की रोटी का सेवन करने से आपकी भूख भी control में रहती है। यानी कि आपको जो अनावश्यक भूख लगती है वो ज्वार के सेवन से बंद हो जाती है।
  • अगर आप ज्वार के चोकर का प्रयोग करते हैं तो उसमें भरपूर मात्रा में antioxidants होते हैं जो cancer के विकास की संभावना को कम कर देते हैं।
  • ज्वार की रोटी का सेवन करने से आपकी energy भी बढ़ती है।
  • ज्वार की रोटी के सेवन से आपको सर दर्द से राहत मिलती है।
  • जिन लोगों को बवासीर (piles) की शिकायत है उनके लिए तो ज्वार की रोटी खाना रामबाण साबित हो सकता है। इसका सेवन करने से उनकी ये बीमारी बहुत की जल्द ठीक हो जाती है।
  • खून को purify करने में भी ज्वार की रोटी खाना फायदेमंद होता है।
  • Skin पर अगर किसी भी कारण से कील मुहासे निकल आए हों तो भी आप ज्वार की रोटी का सेवन करिए। आपके मुहांसे गायब हो जाएंगे।
  • अगर किसी व्यक्ति को पेचिश की शिकायत है तो इसे भी दूर करने में गेहूं की रोटी खाना काफी ज़्यादा सहायक सिद्ध हो सकता है।
  • पीलिया (Jondis) के इलाज में भी ज्वार की रोटी का कोई मुकाबला नहीं है।
  • अगर आपको या आपके किसी जानकार को लकवा मार गया है तो उन्हें चाहिए कि ज्वार के दानों को उबाल लें। फिर उसमें बराबर मात्रा में एरंड का तेल डाल लें। अगर वो इसका लेप लगातार लगाएंगे तो उनकी ये समस्या दूर हो जाएगी।
  • कुछ लोगों को अपच (indigestion) की समस्या भी रहती है। चाहे वे कुछ भी खा लें उन्हें पचता ही नहीं है। उनका पाचन तंत्र (Digestive System) बहुत ही ज़्यादा कमजोर होता है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे ज्वार के बीजों का सेवन करें। इससे उनका पाचन तंत्र भी मजबूत होगा और Acidity की समस्या भी अगर है तो वो भी दूर हो जाएगी।
  • जिन लोगों को बहुत ज़्यादा खांसी आती है उन्हें भी ज्वार की रोटी खानी चाहिए। इससे उन्हें जल्द ही राहत मिल जाएगी।
  • जो लोग कान के दर्द से बहुत अधिक परेशान हैं उन्हें भी चाहिए कि वो गेहूं की रोटी न खाकर ज्वार की रोटी का सेवन करें। इससे उन्हें कान के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा।
  • ज्वार की रोटी अगर आप खाएंगे और ज्वार के आटे को आंखों के नीचे काजल की तरह लगाएंगे तो आपके आंखों से संबंधित समस्या भी दूर हो सकती है।

ज्वार की रोटी खाने के नुकसान:

  1. दोस्तों, अगर आप ज्यादा मात्रा में ज्वार की रोटी का सेवन करते हैं तो इसके आपको side effects भी देखने को मिलेंगे।
  1. इसका सेवन करने से कुछ लोगों को घबराहट हो सकती है।
  1. बहुत से लोगों को इसका सेवन करने से anxiety होती है।
  1. कुछ लोगों को ज्वार की रोटी खाने से कब्ज की समस्या भी होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

तो दोस्तों, आज आपने इस लेख में जाना कि ज्वर क्या है? ज्वर की रोटी खाने के फायदे क्या हैं? आपने ये भी जाना कि ज्वार की रोटी खाने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं। मिलते हैं next article में। 

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